तेंदूपत्ता अग्निकांड के बीच डीएफओ रमेश जांगड़े के समर्थन में उतरे कर्मचारी, वन मंत्री को भेजा ज्ञापन

# Neeraj Makhija | 01 Jun, 2026

डेस्क //- बीजापुर के इटपाल स्थित तेंदूपत्ता गोदाम में हुई भीषण आगजनी और उसके बाद वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) रमेश कुमार जांगड़े को हटाए जाने की कार्रवाई के बीच अब वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी उनके समर्थन में सामने आए हैं विभागीय कर्मचारियों द्वारा वन मंत्री केदार कश्यप को एक ज्ञापन सौंपकर जांगड़े को पुनः बीजापुर वनमंडल में पदस्थ रखने का अनुरोध किया गया है

 

ज्ञापन में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उल्लेख किया है कि रमेश कुमार जांगड़े के कार्यकाल में बीजापुर वनमंडल में प्रशासनिक कार्यों को नई दिशा मिली और कर्मचारियों को कार्य करने के लिए सकारात्मक वातावरण प्राप्त हुआ। कर्मचारियों का दावा है कि जांगड़े के नेतृत्व में वनमंडल के अधिकांश कार्य समय-सीमा के भीतर पूरे किए गए तथा विभागीय समन्वय भी बेहतर रहा

 

कर्मचारियों ने ज्ञापन में यह भी कहा है कि जांगड़े अपने सहज व्यवहार, कार्यशैली और कर्मचारियों के प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण के कारण विभाग में लोकप्रिय रहे हैं। उनके स्थानांतरण से विभागीय कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताते हुए कर्मचारियों ने शासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है

 

गौरतलब है कि 25 मई को बीजापुर जिले के इटपाल स्थित एक निजी गोदाम में तेंदूपत्ता में आग लगने से करोड़ों रुपये के नुकसान का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद वन मंत्री केदार कश्यप ने सख्त रुख अपनाते हुए डीएफओ रमेश कुमार जांगड़े को तत्काल प्रभाव से हटाकर रायपुर मुख्यालय संबद्ध कर दिया था तथा मामले की जांच के निर्देश दिए थे

 

हालांकि विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि घटना की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है,ऐसे में किसी अधिकारी के पूरे कार्यकाल का मूल्यांकन केवल एक घटना के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कर्मचारियों ने जांगड़े के कार्यों और उपलब्धियों को भी ध्यान में रखने की मांग की है अब सबकी नजर शासन और वन मंत्री के अगले फैसले पर टिकी है कि कर्मचारियों के इस ज्ञापन और समर्थन के बाद आगे क्या निर्णय लिया जाता है..

तेंदुपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 में संग्राहक परिवार के हित में एस्मा कानून लागु किया गया। शाख-कर्तन प्रारंभ से पूर्ण संग्रहण एवं गोदामीकरण तक की सम्पूर्ण अवधि तक तेंदूपत्ता संग्रहण एवं विपणन में लगे अधिकारियो कर्मचारियों एवं प्रबंधकों को निम्नांकित अत्यावश्यक सेवा में कार्य करने से इंकार किये जाने पर प्रतिषेध किया जाता है। ​

यह नियम छत्तीसगढ़ अत्यावश्यक सेवा संधारण तथा विच्छिन्नता निवारण अधिनियम, 1979 (क. 10 सन् 1979) की धारा 4 की उप-धारा (1) एवं (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों के आधार पर होता है। एस्मा में ​"तेंदूपत्ता संग्रहण सीजन 2026" में संलग्न समस्त अधिकारियो कर्मचारियों एवं प्रबंधकों को अत्यावश्यक सेवाओं में संलग्न माना जायेगा। कर्मचारियों - अधिकारीयों प्रबंधको के अवकाश, स्थानांतरण पर रोक लगाया जाता है।

​यह आदेश राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से 03 (तीन मास) तक की कालावधि के लिये प्रभावी रहता है।

ऐसे परिस्थिति में ईटपाल अग्निकांड के बिना जाँच किये वरिष्ठ स्तर के अधिकारी का स्थानांतरण शासन के निर्णय पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाता है

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