350 श्री सहज पाठों की सामूहिक समाप्ति-संगत में गूंजी गुरु वाणी..

# Neeraj Makhija | 26 Nov, 2025

बिलासपुर//- गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा दयालबंद बिलासपुर में सिख धर्म के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350 साल शहादत शताब्दी बड़े ही श्रद्धा एवं भावना के साथ मनाया गया श्री गुरु तेग बहादुर जी का लासानी जीवन का हर एक पहलू विशेष महत्व रखता है..

धर्म की आजादी की आवाज बुलंद करके एवं दूसरेधर्म की रक्षा के लिए आपने अपनी जान कुर्बान कर दी और शहादत के इतिहास में एक नया पन्ना लिखा दशमेश पिता की हजूरी कवि सेनापति जी के शब्द में कहा जाए तो अपनी अदिति शहादत के लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी हिंद की चादर ही नहीं बल्कि कुल मनुक्ता की चादर बने

मानवता के रखवाले श्री गुरु तेग बहादुर जी सिख धर्म के छठवें गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी एवं माता नानकी जी के सुपुत्र थे तप और त्याग की मूरत श्री गुरु तेग बहादुर जी अति ऊंचे दर्जे के संवेदनशील एवं संजीत महापुरुष थे

यही कारण है कि जब कश्मीर के पंडित ने आनंदपुर साहिब जाकर औरंगजेब की जुल्म की दास्तान गुरु जी को सुनाया और हिंदू धर्म बचाने की याचना की तो गुरु जी अपनी महान कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए औरंगजेब द्वारा दिए गए तासिहे को सहकार अपने धर्म में अडोल रहे दिल्ली के चांदनी चौक मैं श्री गुरु तेग बहादुर जी सहित तीन गुरु सिख भाई मती दास भाई सती दास भाई दयाल जी को बड़ी यातनाएं देते हुए शहीद की किया गया उन महान महापुरुषों का शहीदी गुरपूर्व पूरा विश्व 25 नवंबर को बड़े ही श्रद्धा के साथ मनाया गया

अपने देश धर्म और कौम के लिए बहुत सी शहादत हुई लेकिन दूसरे धर्म की रक्षा के लिए जो कुर्बानी श्री गुरु तेग बहादुर जी ने दी वह अपने आप में एक मिसाल है कल श्री गुरु सिंह सभा दयालबंद से एक भव्य शहीदी बाइक रैली का आयोजन भी किया गया जो गुरुद्वारा साहिब से निकाल के गुरु नानक चौक तारबार चौक मंदिर चौक जगमाल चौक गांधी चौक अग्रसेन चौक गोडपारा होते हुए 27 खोली गुरुद्वारा में समापन किया गया..

जिसमें जगह-जगह पर विभिन्न धर्म के लोग द्वारा इस धार्मिक यात्रा का स्वागत फूलों की वर्षा से की गई इस कड़ी में बहुत सारे कार्यक्रम आयोजित किए गए साथ संगत द्वारा गुरु जी की वाणी का उच्चारण जिसमें बच्चों सहित बुजुर्गों ने भाग लिया एवं इस पर्व को मनाने के लिए उचित तौर पर कथा वाचक भाई अमरीक सिंह जी चंडीगढ़ वाले एवं सुखवंत सिंह जी हजूरी रागी अमृतसर से आकर गुरु इतिहास एवं गुरु जस सुन कर साधसंगत को निहाल किया..

शताब्दी के 350 वर्ष पूर्ण होने के लिए श्रद्धांजलि तौर पर श्री सुखमणि साहिब सर्कल द्वारा 350 श्री सहज पाठों की समाप्ति सुबह गुरु घर में एक साथ संगतो के सहयोग द्वारा भी किया गया जिसमें निर्धारित ड्रेस कोड भी रखा गया था उपरांत सुबह 10:00 बजे से लेकर 2:00 बजे तक विशेष कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया समाप्ति उपरांत गुरु का अटूट लंगर भी वरताया गया इन सभीकार्यक्रमों में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सभी सदस्य एवं सामुहसाध संगत का सहयोग रहा..

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