जिस प्रकरण में मिलना था इनाम उसमें ही मिली टीआई कलीम को सजा..

# Neeraj Makhija | 06 May, 2025

डेस्क//- बिलासपुर में जिस आरोपी को पकड़ने के लिए टीआई कलीम खान को सजा दी गई है और डिमोट कर एसआई बनाया गया है,उसने मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलाने के नाम पर 82 लाख रुपए की धोखाधड़ी की थी। वह जेल से पैरोल में छूटने के बाद से फरार है, जिसे पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है,वही जैसे ही इसपर आदेश जारी हुआ बिना सच को जाने कई मीडिया ने कर दिया निरीक्षक का ट्रॉयल,जबकि सच ये है कि महिला संबंधी कोई मामला ही नही था जिसपर टीआई कलीम पर कार्यवाही हुई हैं वह प्रकरण ही दूसरा है बताते चले आपको दूसरी तरफ उसी आरोपी की पत्नी की शिकायत पर चार साल बाद पुलिस अफसरों ने अपने ही विभाग के थानेदार को निशाना बनाया है..

दिल्ली के दीपक चटर्जी, गाजियाबाद के डॉ. जिया उलहक रहमानी, बरेली रुहेलखंड उत्तर प्रदेश के प्रभुदीप सिंह ने मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के नाम पर 82 लाख रुपए की ठगी की थी। जिस पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद आरोपियों को दिल्ली में दबिश देकर गिरफ्तार किया। सात माह बाद पत्नी ने की शिकायत, टीआई पर लगाए गंभीर आरोप जिया उलहक रहमानी की गिरफ्तारी के सात माह बाद उसकी पत्नी ने पुलिस अफसरों से शिकायत की, जिसमें उसने आरोप लगाया कि पति की गिरफ्तारी के बाद टीआई कलीम खान ने जमानत कराने के लिए चार लाख रुपए की डिमांड की। साथ ही उसके साथ अभद्रता करते हुए मोबाइल पर गलत तरीके से बात की।

तत्कालीन एसपी दीपक झा ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक जांच कराई, जिसके बाद विभागीय जांच की अनुशंसा की गई। विभागीय जांच में आरोप साबित नहीं सूत्रों का कहना है कि विभागीय जांच में टीआई कलीम खान पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए। जिस समय महिला ने घटना होने की जानकारी दी है, उस समय टीआई कलीम का लोकेशन दिल्ली के बजाए मुंबई में मिला। वहीं, आरोपी पति और उसकी पत्नी के बीच चैटिंग हुई है, जिसमें दोनों के बीच बातचीत में चार लाख रुपए क्लाइंट यानी की प्रार्थी के अकाउंट में देने की बात कही गई है। जांच के दौरान महिला को लगातार नोटिस देकर उपस्थित होने कहा गया। लेकिन, वो एक बार भी उपस्थित नहीं हुई।

तत्कालीन एसपी ने आरोपियों को पकड़ने भेजा था दिल्ली

जिस समय आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, तब यहां एसपी प्रशांत अग्रवाल पदस्थ थे। उन्होंने ने ही आरोपियों को पकड़ने के लिए टीआई कलीम खान को दिल्ली भेजा था। उनके साथ प्रार्थी तरूण साहू भी थे, जिन्होंने आरोपियों का ठिकाना पुलिस को बताया। जिसके बाद कलीम खान व उनकी टीम ने दिल्ली के दीपक चटर्जी, गाजियाबाद के डॉ. जिया उलहक रहमानी, बरेली रुहेलखंड उत्तर प्रदेश के प्रभुदीप सिंह को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से 5 मोबाइल व 5 लाख रुपए जब्त किए थे।

प्रस्तुतकर्ता अधिकारी ने जांच में आरोप अप्रमाणित बताया इस पूरे मामले की जांच में प्रस्तुतकर्ता अधिकारी सीएसपी उदयन बेहार थे, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि टीआई और कलीम खान के बीच कोई असामान्य बातचीत नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि महिला का कोई भी आरोप प्रमाणित नहीं है।

दूसरी तरफ प्रार्थी तरूण साहू ने जनवरी 2021 में एक शिकायत की थी, जिसमें उन्होंने पुलिस को पेन ड्राइव के साथ साक्ष्य प्रस्तुत किया था। साथ ही बताया था कि आरोपी और उसकी पत्नी मिलकर उसे और टीआई कलीम खान को फंसा सकते हैं। लेकिन, उनकी शिकायत पर कोई जांच नहीं की गई। जिस केस में टीआई को सजा, उसके आरोपी को नहीं पकड़ पाई पुलिस जिस केस में महिला की शिकायत पर पुलिस अफसरों ने टीआई को सजा दी है। उसके आरोपी को टीआई ने पकड़ा था। बाद में कोरोना काल का फायदा उठाकर वो पैरोल पर छूट गया, जिसके बाद से आरोपी फरार है। स्थिति यह है कि पुलिस अब तक उस आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है,दूसरी तरफ आरोपी की पत्नी की शिकायत पर अब टीआई का डिमोशन कर दिया गया है।

आईजी बोले- जांच रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई

इधर, आईजी डॉ. संजीव शुक्ला का कहना है कि टीआई कलीम खान के खिलाफ विभागीय जांच चल रही थी। जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने पर उन्हें सजा दी गई है, जिसके तहत उनका डिमोशन कर एक साल के लिए एसआई बनाया गया है

 जानिए क्या था पूरा मामला..

 दरअसल, मामला साल 2020 का है। कोनी थाने में तरूण साहू ने धोखाधड़ी की शिकायत की थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उनकी बेटी निखर शारदा का पश्चिम बंगाल के निजी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन कराना था। इसी तरह रायगढ़ के मित्र दीपक शर्मा भी बेटी को प्रवेश दिलाना चाहते थे। इसके लिए 18 अक्टूबर को दोनों दिल्ली गए थे। इस दौरान उनका परिचय प्रभुदीप सिंह से हुआ और उसने उनकी बेटी का दाखिला कराने का आश्वासन दिया।

प्रभुदीप सिंह के साथ डॉ. जियाउल हक रहमानी व दीपक चटर्जी मिलने आए। प्रभुदीप सिंह ने प्रति छात्र 10 लाख रुपए एडवांस की मांग की। घर आकर दीपक ने उनके बताए अकाउंट में 3 लाख व तरुण ने 10 लाख रुपए जमा कराए। तरुण के एक परिचित झारखंड टाटा नगर निवासी भागवत वर्मा ने अपनी बेटी के एडमिशन के लिए प्रभुदीप से बात की। उन्होंने डॉ. जियाउल को 15 लाख रुपए दिए। प्रभुदीप, डॉ. जियाउल हक व दीपक चटर्जी ने तीनों से 82 लाख रुपए ले लिए। जिसके बाद न तो उनके बच्चों को मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिला और न ही ठगों ने पैसे लौटाए, जिस पर पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था..

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